कविता "भटक गया कुछ समय के लिए"



भटक गया कुछ समय के लिए
मैं अपनी मंजिल से तो
क्या हुआ 
बस थोड़ा सा थका हुआ हूँ  लेकिन
हारा मैं बिल्कुल भी 
नहीं हूं

फिर से कर लूंगा  नई शुरुआत
जिंदगी की
बाजुओं पर अपने तो मुझको है
पूरा यकीन
कमजोरी को अपनी मैं ताकत
बना दिखाऊंगा

जो खोया था हर हसीन पल मैंने
एक-एक गिनकर के वापस
ले आऊंगा
अपनों के होठों की मुस्कानों को
रब से कहकर वापस 
मँगवाऊंगा
अपनी मेहनत के रंगों से
किस्मत की लकीरों को मैं
सँवरवाऊंगा
 बनकर के एक मील का पत्थर
मैं औरों को भी राह
दिखाऊँगा

भटक गया कुछ समय के लिए
मैं अपनी मंजिल से तो
क्या हुआ 

10 comments:

  1. बहुत उम्दा सृजन

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  2. आभार नदीशजी

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  3. आपकी लिखी रचना "मित्र मंडली" में लिंक की गई है https://rakeshkirachanay.blogspot.in/2017/07/25.html पर आप सादर आमंत्रित हैं ....धन्यवाद!

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  4. शुभ प्रभात बहन
    जो खोया था हर हसीन पल मैंने
    एक-एक गिनकर के वापस
    ले आऊंगा
    अपनों के होठों की मुस्कानों को
    रब से कहकर वापस
    मँगवाऊंगा
    बेहतरीन पंक्तियाँ
    सादर

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  5. कृपया गूगल फॉलोव्हर भी एड कीजिए
    सादर

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  6. बहुत खूब प्रेरणादायक संदेश ।

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  7. ओज़स्वी ... हर इन्सान के जीवन में ऐसे पल आते हैं पर हिम्मत उर मेहनत से जो बढ़ जाता है वो निकल जाता है ... गहरा सन्देश है इस रचना में ...

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  8. सभी को आभार |

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  9. आभार जोशीजी |

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