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भजन "सब मुरादे पूरी करदे मईया"



सब मुरादे पूरी करदे मईया
हलवा पूरी बँटवाऊँगी
मेरे बिगड़े काम बना दे मईया
तेरे दर पे दौड़ी आऊँगी
बँटवाऊँगी,मैं दौड़ी आऊँगी
बँटवाऊँगी,मैं दौड़ी आऊँगी
मैंने ये वादा तुमको दिया
इसे पूरा करके दिखाऊँगी
मैंने ये वादा तुमको दिया
इसे पूरा करके दिखाऊँगी

भक्तों को मईया बस तेरा सहारा
कृपा तुम्हारी हो तो कोई ना हारा
मुझको भी मईया अब आकर बचा लो
जीवन की कश्ती डूबी इसको सँभालो
तुम रूठी हो तो क्या मईया 
एक दिन तुम मान ही जाओगी
तुम रूठी हो तो क्या मईया 
एक दिन तुम मान ही जाओगी

जिसने भी मईया तेरा नाम लिया है
माँ ने अपने हाँथों से थाम लिया
मैं भी हूँ मईया डगर अपनी भूली
आकर के तुम जल्दी रस्ता दिखाओ 
मैंने तुम पर सब छोड़ दिया
तुम ही सब कुछ सुलझाओगी
मैंने तुम पर सब छोड़ दिया
तुम ही सब कुछ सुलझाओगी

सब मुरादे पूरी करदे मईया
हलवा पूरी बँटवाऊँगी
मेरे बिगड़े काम बना दे मईया
तेरे दर पे दौड़ी आऊँगी
बँटवाऊँगी,मैं दौड़ी आऊँगी
बँटवाऊँगी,मैं दौड़ी आऊँगी
मैंने ये वादा तुमको दिया
इसे पूरा करके दिखाऊँगी
मैंने ये वादा तुमको दिया
इसे पूरा करके दिखाऊँगी

शायरी "ना जाने ये कैसा रिश्ता है"



ना जाने ये कैसा रिश्ता है

मेरा और मेरे प्यार का

जितना चाहूँ दूर हो जाऊँ

उतना ही मैं पास खिंचा

पता मुझे यार की फितरत

ना मिलेगा कुछ भी मकां

फिर भी परवाने की तरह

 मैं तो चाहूँ हरदिन जलना

बस उसमें वो बात है दिखती

जिस पर हुआ मैं तो फ़िदा

 चांहे लाख  वो मुझे ठुकराले

पर ना टूटेगा दिल का रिश्ता



कविता "ना जाने कैसा है फितूर "


ना जाने कैसा है फितूर 
मेरा नहीं इसमें कसूर
बस तेरे ही सपने आते
बंद करूं आँखें या खोलूँ
जबसे तेरी  झलक दिखी
तब से मैं पागल सी हुई
फिर तेरी तलाश में ही मैं तो
दीवानों की तरह भटकी
अब तो बहुत दिन हो चले 
इतना ना कर मुझे बेकरार
मिलजा कामयाबी आकर के तू
कि अब तो नहीं होता इंतज़ार

अर्चना



शायरी"चार कदम के"




चार कदम के

हमसफर थे
बस चार दिनों को
मिले थे
बस चार दिनों 
में ही वो
मेरे दिल में
बसे थे
रोए थे हम
हँसे थे
रूठे भी और
फिर मने थे
बस चार दिनों
में ही हम
पूरी उम्र को
जिये थे
चार दिनों में
मिलन हुआ
और फिर अलविदा
कह दिए
चार दिनों के
बाद तो हम
जिंदगी बेमानी 
सी जिए 

अर्चना

शायरी"इश्क खता है "


इश्क 

इश्क खता है 
इश्क सजा है 
इश्क सभी को 
फिर भी हुआ है
लाख कोशिशें 
करी थीं हमने
फिर भी ना जाने
कैसे हुआ है
हम थे इस सब
से अनजाने
फिर भी बन गए
हैं अफसाने
आगे बढ़ें या
पीछे हट जाऐं
ये बात समझ
में ना आए
डर है ना कहीं
फिर पछताऐं
इस दरिया में 
ना फँस जाऐं
फिर भी दिल है
के ना माने









बस यार को ही
ये खुदा माने

अर्चना

शायरी"प्यार करने वाले"




प्यार करने वाले
सिर्फ़ प्यार ही चाहते हैं
दुनिया की बनाई रस्मों को
समझ कहाँ पाते हैं
यार की आँखों में अपना
सपना सजाना चाहते हैं
परवाह नहीं वो किया करते
कि लोग क्या चाहते हैं
यार के कदमों में वो
जन्नत ले आना चाहते हैं
फिर आयें चाहें लाख तूफान
वो नहीं घबराते हैं
बन जाये बेरी ये जमाना
पर पीछे ना हट पाते हैं
शान से एक दूसरे की
बाँहों में मर जाते हैं

अर्चना


हिन्दू नववर्ष पर कविता "नववर्ष की पावन बेला आई"

हिन्दू नववर्ष पर कविता "नववर्ष की पावन बेला आई"


हिन्दू नववर्ष पर कविता "नववर्ष की पावन बेला आई"


नववर्ष की पावन बेला आई
दिल में है नयी उमंगें छाईं
जहाँ तलक भी नज़र है पड़ती
दिखती है धरती हर्षाई


खेतों में लहराती फसलें
देख-देख किसान भी झूमे
आने वाला है बैसाख भी
लगने वाले हैं कई मेले
हरे-हरे पत्तों ने भी खूब है
प्रकृति की रौनक बढ़ाई
जहाँ तलक भी नज़र है पड़ती
दिखती है धरती हर्षाई


रंग-बिरंगे पुष्प खिले हैं 
भँवरे जिन पर डोल रहे हैं
चल रही जो शीतल हवाएँ
मन को हैं मलंग कर जाएँ
कूकने लगी हैं कोयल भी
चिड़ियों ने अपने घौंसले बनाये
जहाँ तलक भी नज़र है पड़ती
दिखती है धरती हर्षाई

नवरात्रि का आरम्भ हुआ है
माँ का घरों में दरबार सजा है 
सुबह-सुबह शंखों की गूंज से
बड़ा आलौकिक वातावरण हुआ है
आपके जीवन में भी यह नववर्ष
सारी खुशियों को भरके जाये 
जहाँ तलक भी नज़र है पड़ती
दिखती है धरती हर्षाई


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कविता "इंटरनेट के साइड इफ़ेक्ट "



हुआ एक दिन 
मिया बीबी का झगड़ा
फूला फिर बीबी का
सुंदर सा मुखड़ा
क्योंकि मियाजी बहुत
गुस्से में आये 
उन्होंने बीबी पर कई
इल्जाम लगाये
बोले अब तुम
लापरवाह हो गयी हो 
दिनभर फेसबुक को
चलाया करती हो
बच्चों की क्या
शकल हुई है
सब्जी ,बहुत तीखी
या फीकी मिल रही है
ये तो बहुत ही
नासमझी है
घर की भी अब
सूरत बिगड़ी है
फिर बीबी भी 
जोश में आई
उसने भी मिया की
गलतियाँ गिनवायीं
कल मैंने तुमसे
मटर पनीर मंगवाई
पर तुम पालक
लटकाकर लाये
तुमने भी अब
हद कर दी है
बिजली के 
बिल की जगह 
तुमने फ़ोन की 
बिल भर कर दी है
ये सब तुम्हारे
उस मूए 
व्हाट्सअप की ही 
सारी गलती है
फिर शिकायतों की
तीखी बौछारें 
दोनों तरफ से
लगी थी आने
घर के कमरे से
आने लगी थी 
सिनेमा जैसी 
डॉल्बी डिजिटल आवाजें 
फिर बच्चों ने
समझौता करवाया 
माँ की फेसबुक
पापा का व्हाटसअप
बंद करवाया 
हुआ जो बंद
थोड़े दिन इन्टरनेट 
तो घर में
पहले की तरह 
खुशियों का मौसम
दोबारा वापस आया 

अर्चना

कविता"जल होता सबका ही जीवन"


"इस कविता में मैंने जल की कुछ विशेषताओं का वर्णन किया है |"


जल होता सबका ही जीवन
चाहें हो मानव या हो पशुजन
कम हो रहा है ये तो दिन-प्रतिदिन
अब खोलो आँखे सोचो हुआ है दिन 

जल के बिन तो नहीं हो सकती
एक पल भी जीवन की कल्पना
जल होता अमृत का प्याला
जिसकी सभी को होती तृष्णा

जल बिन सारे कार्य अधूरे
बिन जल के तो बाग़ भी उजड़ें
कैसे सींचोगे खेत-खलियानों को 
जल रक्षा की नहीं हो परवाह करते

ये तो है धन से भी कीमती
करो इसकी तुम बचत सब दिन
वर्ना कोई नहीं बचा पायेगा 
जब जल-देवता हो जायेंगे रुष्ट

अर्चना



कविता "तू ही जाने प्रभु तेरी जो माया "


तू ही जाने प्रभु तेरी जो माया

कहीं धूप है और कहीं छाया
किसी को राजा ,किसी को रंक बनाया
ये हमारी समझ में क्यों नहीं आया 
क्यों नहीं लिखीं एक सी तकदीरें
कोई दाने को दर -दर घूमे
और कोई भरी हुई थाली में भी
जब चाहे देता लात लगाए
किसी पे नहीं तन ढकने को कतरन
रोता रहता वो हर एक नये दिन
और कोई लाखों खर्च करके
कटी-फटी डिज़ाइनर ड्रेसेस बनवाये
किसी का बच्चा बड़े नाज़ों से पलता
जो खिलौना छू दे वो ही मिलता
और कोई बच्चा बूट पोलिश कर -कर के
बड़ी मुश्किलों से जीवन बिताए
प्रभु आप करोगे कब ये न्याय

ये और ना हमसे देख जाये

प्रभु , और ना हमसे देख जाये


 

                                                  








यार के लिए एक सुंदर गीत "बस एक झलक मिल जाए यार की"

यार के लिए एक सुंदर गीत








यार के लिए एक सुंदर गीत:-

इस गीत में एक महबूब ने सिर्फ अपने यार की एक झलक पाने की चाह की है|


बस एक झलक मिल जाए यार की


बस एक झलक मिल जाए यार की
एक झलक मिल जाए 
 किस्मत मेरी बन जाए पाकर उन्हे 
 किस्मत मेरी बन जाए 
मै यार बिना हूँ अधूरा सा
और ख्याव भी लगते अधूरे से
वो आके थामें हाथ मेरा
और गिलाऐं शिकवे दूर करें
अब की बारी ना माने तो
अब की बारी ना माने तो
मै रख दूँगा जांन उनके कदमो तले
बस एक झलक मिल जाए यार की
एक झलक मिल जाए 
 किस्मत मेरी बन जाए पाकर उन्हे 
 किस्मत मेरी बन जाए 
ये सांसे तो बस चलती हैं
बस नाम तेरा ही ले ले कर
गर ना आ पाये पास मेरे
तो भेज दे केवल अपनी खबर
मुझे हर चेहरे में दिखती है
मुझे हर चेहरे में दिखती है
बस तेरी ही मुस्कान 
बस एक झलक मिल जाए यार की
एक झलक मिल जाए 
 किस्मत मेरी बन जाए पाकर उन्हे 
 किस्मत मेरी बन जाए 



प्यार करने वालों पर यह शायरी भी पढ़ें 
"प्यार करने वाले "

गीत "मेरी नज़र में तुम हो"


"इस गीत में एक इन्सान किसी के प्यार में इस कदर खो जाता है कि उसे हर जगह वही दिखाई देता है |"

 
मेरी नज़र में तुम हो
मेरे जिगर में तुम हो
जब देखता आईना दिखते मुझे तो तुम हो
अब हो गया दीवाना
मैं सब से ही अंजाना
तुम से ही अब तो मैं हूँ मुझसे ही अब तो तुम हो
जब देखता आईना दिखते मुझे तो तुम हो
एक पल कटे न तुम बिन
चाहे जहाँ भी जाऊं
यादें तुम्हारी मुझको तेरे पास ही बुलाएँ
जब देखता आईना दिखते मुझे तो तुम हो
कैसी है बे-करारी इसमें मजा है आये
कभी लगती ये दुआ है 
कभी लगती ये सजा है
जब देखता आईना दिखते मुझे तो तुम हो
मेरी नज़र में तुम हो
मेरे जिगर में तुम हो
मेरी नज़र में तुम हो
मेरे जिगर में तुम हो
 
अर्चना

कविता"रब ही जाने ये इश्क क्या है"

 

 

"इस कविता में मैंने इश्क के बारे  बताया है"

 
 
 
कोई  इसे कहता है सजा है
कोई इसे कहता है मजा है
रब ही जाने ये इश्क क्या है
रब ही जाने ये इश्क क्या है
कोई इसे कहता है नशा है
कोई इसे कहता है खता है
रब ही जाने ये इश्क क्या है
रब ही जाने ये इश्क क्या है
कोई इसे कहता है दुआ है
कोई आग का दरिया कहता है
रब ही जाने ये इश्क क्या है
रब ही जाने ये इश्क क्या है
कोई इसमें जां लेता है
और कोई हँसकर जां देता है
रब ही जाने ये इश्क क्या है
रब ही जाने ये इश्क क्या है
 
 
अर्चना

कविता "मिल गया है यार मुझको"

 

 

 

"इस कविता में एक प्रेमी ने अपने यार की तारीफ़ की है|"

 
 
 
मिल गया है यार मुझको
अब नहीं कुछ माँगना
ऊपर वाले मेरा तुम को
बार बार शुक्रिया
यार की बाँहो में ही तो
मेरे दोनों हैं जहाँ
यार की आँखो में दिखती
मुझको सारी कायनात
यार ही मेरा धर्म है
यार ही मेरा कर्म
यार ही सांसो में बसता
वो ही है दिल की धड़कन
मैं रहूँ या ना रहूँ
पर यार को रखना सदा
अगर करे खता वो कोई
मिल जाये बस मुझे सजा
 
 
अर्चना

कविता "मेरे इश्क की ये दास्ताँ है"

 

 

"इस कविता में एक इंसान अपने प्यार से मिले धोखे को बयां कर रहा है |"

 

 


मेरे इश्क की

ये  दास्ताँ है

एक हंसी चेहरे ने

मुझको ठगा है

चांहे यार था 

पत्थर दिल का

पर वो ही लगता

मुझको भला था

सब चांहे लगें

मुझे समझाने

पर दिल उनकी 

कभी न माने

जुल्म भी यार

ने कर डाले

फिर भीं हम न

हुए बेगाने

हमारी वफ़ा का

सिला मिल जाये

दिल था बस यही 

एक आस लगाये

पर शायद ये

गलत थी बातें

रोकर काटनी 

बाकी थी रातें

अब जाकर हमको ये

यकीं हुआ है

जब यार गैरों की

बाँहों में दिखा है

ये बातें तो

बहुत सताएं

जब धोखा 

अपनों से खायें

 
अर्चना

कविता "बता ऐ यार "

 

 

"इस कविता में एक प्रेमी अपने प्रेम को साबित करने के लिए तरह तरह के काम करने को कह रहा है"

 

 

 

 

पलकों पे बिठाऊँ या तुझे दिल में सजाऊँ

बता ऐ यार 

कैसे तुझसे मैं 

प्रेम जताऊँ

सीने से लगाऊँ या आँखों में छुपाऊँ

बता ऐ यार 

कैसे तुझे दुनिया

से बचाऊँ

हथेली को तेरी राहों में बिछाऊँ या गुलशन को तेरी जुल्फों में सजाऊँ

बता ऐ यार 

कैसे मैं तेरे नखरों को उठाऊँ

चाहत के लिए चाँद-तारे ले आऊं या चौखट पे तेरी ता उम्र् बिताऊँ

बता ऐ यार 

कैसे में अपनी दीवानगी को समझाऊँ

 
 
 

अर्चना