कविता " मेरी दादी "

मेरी दादी 


"इस कविता के माध्यम से मैंने एक छोटे बच्चे और उसके प्रति दादी के स्नेह का वर्णन किया है"


मेरी दादी बड़ी ही प्यारी
मुझ पर जान लुटाने वाली
जब भी मैं हूँ गाँव को जाता

मुझको बाँहों में भर लेती 
फिर माथे और हथेलियों को
जी भर के है चूमा करती 
फिर पूछती राजा बेटा
अब तू बता के क्या खाएगा
चांहे कोई भी वक़्त हुआ हो
तनिक फिकर भी न है करती
लग जाती है चूल्हे पर फिर
साग और रोटी बनाया करती
मेरे लिए वो लड्डू बनाकर
पहले से ही डब्बा भर रखती
रात को अपनी गोद में लेती
बार- बार मेरी बलईयां लेती
पता नहीं कब मैं सो जाता
पर वो रात भर पंखा झलती
सुबह को मुझको  तैयार करके
बहुत सा काजल लगाया करती
और मुझे अपनी कमर पे लेकर
आस -पास है घुमाया करती
जब मै हूँ शहर आ जाता

फ़ोन पे है वो रोया करती
मेरी दादी सबसे प्यारी
हाँ ,मेरी दादी सबसे प्यारी

(अर्चना)



6 comments:

  1. शुभ संध्या
    बेहतरीन कविता
    सादर

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  2. आभार, यशोदाजी

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  3. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शुक्रवार 28 अप्रैल 2017 को लिंक की गई है...............http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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  4. मार्मिक वर्णन रिश्तों का ,सुन्दर ,आभार।

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  5. रिश्ते का सटीक वर्णन ,आज के समय में ये सब जाने कहाँ खो गया है

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  6. कविता सराहने के लिए सभी मित्रों का आभार |

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