आपका राहें पर स्वागत है

अंधविश्वास पर कविता "कुछ बाबाजी "


अंधविश्वास पर कविता


"कुछ बाबाजी"

भोले - भाले लोगों को 
कुछ बाबजी रोज हैं ठगते
साइन्स के एक्सपेरिमेंट दिखा
खुद को भगवान बताया करते

पर अंदर से ये बहुत मेले 
अत्याचार महिला पर करते 
बाहर से दिखावे के लिए
ब्रह्मचर्य का पालन करते 

जितना धन ना उद्द्योग्पतियों पर
खजाने इनके पास में मिलते
आश्रमों में इनके ही तो 
लाठी ,तमंचे और बंदूके मिलते

ऐसे लोग ही औरत को 
पुत्र प्राप्ति की दवाएं देते
पुरुषों में होते ये जीन्स
 अनपढ़ , गंवार कहाँ समझते

पहन कर के केसरिया चोला 
रूप नये -नये हैं धरते 
बगल में तो होता चाकू
 होंठ से राम जपा करते 

भूत-प्रेत के अस्तित्व को
ये ही हैं बढ़ावा देते
खुद जीते फाइव स्टार की जिंदगी
जनता से नेम- व्रत करवाते

ऐसे पाखंडी लोगों के 
ना बहकावे में कभी भी आना
वर्ना तन , मन और धन से
होगा इनके ही आधीन हो जाना




विश्वास पर कविता पढ़ें 
"मैं हूँ वो मन का विश्वास"







दोस्ती पर कविता | poem on friendship

दोस्ती पर कविता | poem on friendship

दोस्ती  पर कविता | POEM ON FRIENDSHIP


                           ऐ दोस्त तुझे दोस्ती का वास्ता

ऐ दोस्त तुझे दोस्ती का वास्ता
यूं इस तरह से मुझे छोड़ के ना जा
जो वादा तेरा मुझसे हुआ कभी 
कुछ भी करके तू वादे को दे निभा
ऐ दोस्त तुझे दोस्ती का वास्ता

क्या भूल गया साथ में बिताई जो सुबहें
जब नंगे पाँव साइकल के टायर से खेलते
कभी बूढ़े बाबा तो कभी बनिए को चिढ़ाते
मस्त मगन हम दोनों मोज किया थे करते 

साथ -साथ पेड़ों पर थे कूदते -लटकते  
मौका मिलने पर अमरूद लेकर के खिसकते
एक अमरूद का भी मिल बांटकर खाना 
अपनी यारी की मिसालें देता था जमाना

जब इंटरव्यू की कतार में हम दो ही थे बचे 
तू ने कहा "भाई तू चला जा " लग कर के गले
तू ही था परछाई हर कदम पर मेरे
अब क्यो हार मान रहा देदे  मौत को तू शह

ऐ दोस्त मुझे भी है दोस्ती का वास्ता
मुझको हमेशा चाहिए एक हमसफर तेरे सा 
जीते जी मिले या मुझे भी दम हो हारना
नहीं थमेगा कभी अपनी दोस्ती का कारवां 





दोस्तों मैं आशा करती हूँ के आपको ये " दोस्ती पर कविता" पसंद आई होगी | ऐसी एक और कविता नीचे दिये लिंक पर क्लिक कर पढ़ें|


"एक दोस्त होना चाहिए"






दिल पर कविता | poetry on heart

 दिल पर कविताएं 

दोस्तों ये जो दिल है ना ,कहते हैं बड़ा ही पागल होता है|ये जानकार भी कि अगर आपने किसी से दिल लगाया तो आपको बहुत सारी परेशानियां हो सकती हैं मगर ये कहाँ मानता है | दिल की कुछ नादानी और बचकानी हरकतों को बयान करती यह दो कवितायें पढ़िये| |



जब दो दिल मिल गए



जब दो दिल मिल गए
  कुछ ख़्वाब ऐसे बुन गए
अब हसरतें जगने लगीं
और दर्द पुराने गुम गए

हर तरह कलियाँ खिलीं
हवाएँ रेशम लगने लगीं
हर जर्रे में महबूब ही दिखे
अब खुद पे जोर न चले

कभी बात-बात पे हँसें
हर आहट पे ये दिल रुके
अब तेरे दिल की धड़कनें
 मेरे दिल में लगी हैं गूंजने






 दिल का रिश्ता

जो तुझसे दिल का रिश्ता है
उसे नाम मैं ना दे सकूँ
बस दूर से यही चाहता 
तुझे पास महसूस कर सकूँ  

पता मुझे यह अच्छे से

 मिलन नहीं होना ये कभी
क्यूंकि तू बंधा हुआ है
 दुनिया की रस्मों,रिवाजों से

बस तेरी तस्वीर के आगे

 मैं रोज इनायत करता हूँ
तू ही सबकुछ है लेकिन
तेरे सामने पराया बनता हूँ


दिल की और सुनने का मन करे तो यह
गीत भी पढ़ सकते हैं :- "जब दिल दीवाना होता है "









हास्यकविता "अपने बच्चे कम थे क्या "

हास्यकविता "अपने बच्चे कम थे क्या "





अपने बच्चे कम थे क्या 
कि पड़ोस के भी आ गए
अब तो लगता है जैसे
मेरे बच्चों के भी भाव बड़े
कभी मांगते चिप्स के पैकेट
और कभी मांगते कुरकुरे
नींद तो पहली ही कम मिलती 
अब होश भी हैं मेरे उड़ गए 
न जाने शाम तक आते-आते
कितनी बार बर्तन धोने पड़ें
घर को बनाया जंग का मैदान
अब दीवारों पर चित्रकारी करने बढ़े




बच्चों पर एक और कविता पढ़ें
"बच्चे"



हास्यकविता "हमारी नैनीताल यात्रा"



हास्यकविता हमारी नैनीताल यात्रा

हास्यकविता "हमारी नैनीताल यात्रा"

☂☂☂☂☂☂☂☂☂☂☂

जनवरी के महीने में हमने
नैनीताल का प्लान बनाया
सोचा था के नई साल पर
छुट्टियों का जाये लुफ्त उठाया
पर हो गयी बहुत बड़ी गड़बड़
रात में आ गयी बारिश झर-झर
गये थे हम छोटे बच्चों को लेकर
बहुत पछताए फिर वहां जाकर 
बच्चों को लग गयी उल्टियां
और कहीं भी न घूमे हम
 ख़राब मौसम चलते नावें बंद हो गई 
ताल की सैर भी न कर पाए हम
होटल के कमरे में सारा दिन बीता
न पहुंचे भीमताल न पहुंचे मुक्तेश्वर
अगले दिन फिर बैग उठाके
वापस आ गए घर को हम

😄😄😄😄😄😄😄😄



दोस्तों हमारे यह पोस्ट हास्यकविता हमारी नैनीताल यात्रा आपको पसंद आए तो अपने विचार ज़रूर व्यक्त करें और कविता को  शेयर भी करें |ये 
भी पढ़ें:-

हास्य कविता "बबलू भैया की कार "



हास्य कविता "बबलू भैया की कार "




बबलू भईया गाँव चले
नई कार में खूब जचे
चश्मे,टोपी में चमकें
स्टाइल दिखाये बिना नहीं रुके
तीन घंटे में जब गाँव पहुंचे 
उन्हें देख बच्चे उछले
भईया ख़ुशी से बहुत अकड़े
सोचे बच्चे कितना याद करें
पर बच्चे निकल गए साइड से
गाड़ी पर  सब जा चिपके
कोई  बैठा छत पे  चढ़ के
कोई शीशे में चेहरा देखे
कोई  वाईपर को खींच रहा
बाकि के सीटों पर कूदें
ये सब देख भईया चौंके
कोई भी न चाय -पानी पूंछे
भीड़ लगा बस कार तकें
ऊपर से गर्मी थी भयंकर
पसीना तर-तर था टपके
फैंका चश्मा और सूट फैंक के
भईया वहां से रफुचक्कर हुए







सेल्फी पर हास्य कविता" हंसती-सेल्फी रोती सेल्फी"


सेल्फी पर हास्य कविता" हंसती-सेल्फी रोती सेल्फी"




दोस्तों इस पोस्ट सेल्फी पर हास्य कविता हंसती-सेल्फी रोती सेल्फी में मैंने अपनी यात्रा के दिलचस्प अनुभव बताए हैं |जो आपको गुदगुदाएंगे|



सेल्फी पर हास्य कविता" हंसती-सेल्फी रोती सेल्फी"



सेल्फी पर हास्य कविता" हंसती-सेल्फी रोती सेल्फी"


हंसती-सेल्फी रोती सेल्फी
उठते-सेल्फी सोते सेल्फी
बड़े-छोटे सब लेते सेल्फी
मुझको भी यह लत लगी

पहाड़ पर सेल्फी पानी में सेल्फी
पाउट बना बना करना मस्ती
नए- नए से पोज़ देने के चक्कर  में
आईस-क्रीम कपड़ों पर पिघल गिरी

इंडिया-गेट पर सेल्फी मेले में सेल्फी
चांहू फ्रेंड से भी बढ़कर अपनी डी.पी. 
भीड़-भाड़ और सेल्फी के चक्कर में 
ना जाने कब मेरी जेब कटी

लेकिन चांहे कुछ भी हो जाये
छुटती नहीं ये व्याधा गले पड़ी
स्वप्न में भी कल ले ली मैंने
अप्सराओं के संग में सेल्फी

मित्रों आपको ये पोस्ट  "सेल्फी पर हास्य कविता हंसती-सेल्फी रोती सेल्फी" पसंद आए तो अपने विचार ज़रूर बताएं |आप ये भी पढ़ सकते हैं:-













भाई के लिए एक प्यारी कविता | छोटा सा है मेरा भाई

भाई के लिए एक प्यारी कविता | छोटा सा है मेरा भाई 



भाई के लिए एक प्यारी कविता | छोटा सा है मेरा भाई


छोटा सा है मेरा भाई 
बातें लेकिन बड़ी बनाये
तुतला के ऐसे है बोले 
आधों के समझ न आयें 

मटक-मटक के नाच दिखाता 
सारे घर का दिल बहलाता
रीदी-रीदी कह कर मुझसे
मेरे पीछे भागा आता

जब भी कोई त्योहार आता  
वो तो बहुत खुश हो जाता
नये- नये कपड़े पहनकर
बहुत सी फोटो खिंचवाता 

लड़ता भी है जी भर मुझसे 
पर दो पल में मान भी जाता
जब ना होता घर के अंदर 
वीराना सा घर हो जाता

मेरे प्यारे भैया तुझे 
कोई गम ना कभी सताये
भगवान करे के किस्मत तेरी
सूरज से भी ज्यादा चमक जाए 



दोस्तों अगर आपको ये पोस्ट "भाई के लिए एक प्यारी कविता | छोटा सा है मेरा भाई "पसंद आए तो इसे शेयर करना ना भूलें |यह भी पढ़ें :-














हास्यपूर्ण कविता "एक दोस्त की शादी पर "



एक दोस्त की शादी पर 
दूसरे ने जबर्दस्त खुशी मनाई 
किसी के कारण पूछने पर
बोला लो इसकी भी शामत आई 

इसने मेरा व्यंग बनाया
घड़ी-घड़ी था मुझे चिढ़ाया
आज घोड़े पर शान से है बैठा
जिएगा फिर तो गधे की लाइफ

मुझको कहता था "जोरू का गुलाम,
बिन भाभी इजाज़त कर ले कुछ काम" 
तब समझेगा मेरे मन की पीड़ा
जब पॉकेट पे होगी मेडम की लगाम

सब को है बेशक ये पता
बिन पत्नी घर में न पत्ता हिलता 
फिर भी अपने को मुखिया मानकर
करते रहते बस झूठी बड़ाई 
देखो इसकी भी शामत आई











कृष्ण जन्म बधाई गीत "आओ सखियों दे दें बधाई"



कृष्ण जन्म बधाई गीत "आओ सखियों  दे दें बधाई"


आओ सखियों दे दें बधाई
आज नन्द के लाला आयो है
नाचे जाएँ खुशी मनाएँ 
वो जगत दुलारा आयो है


लड्डू लाओ मिस्री लाओ
आकर इसको भोग लगाओ
वस्तर लाओ पैजनी लाओ
आकर इसको रूप सजाओ 
पर काला टीका ना भूल जाना
पर काला टीका ना भूल जाना
मेरा कान्हा बड़ा मनभावन है

आओ सखियों दे दें बधाई
आज नन्द के लाला आयो है

बंसी लाओ मोरपंखी लाओ
ये दोनों इसको भावे हैं
गईया लाओ ग्वाले लाओ
लल्ला तो इन संग खेले है
पर गोपियों को भूल न जाना 
पर गोपियों को भूल न जाना 
मेरा कान्हा बड़ा ही चितचोर है 

आओ सखियों दे दें बधाई
आज नन्द के लाला आयो है
नाचे जाएँ खुशी मनाएँ 
वो जगत दुलारा आयो है




यह कृष्ण भजन भी पढ़ें









सैनिकों के लिये कविता | हे वीर जवान

सैनिकों के लिये कविता | हे वीर जवान

सैनिकों के लिये कविता | हे वीर जवान

सैनिकों के लिये कविता | हे वीर जवान

हे वीर जवान तुम्हें प्रणाम
तुम से ही भारत की शान
तुम बलशाली , शौर्यवान
हँसते-हँसते तजते प्राण

हे वीर जवान तुम्हें प्रणाम
हे वीर जवान तुम्हें प्रणाम


तुम पर्वत से भी अटल
बिजली जैसे तेजवान
तुम्हारी गर्जना सुन काँपते
थर-थर दुश्मनों के पाँव


हे वीर जवान तुम्हें प्रणाम
हे वीर जवान तुम्हें प्रणाम

हौंसला ऐसा बुलंद ,  तुम हो
 जल-थल,गगन में गतिमान
तुम ही बन जाते प्राणदायक
जब-जब देश में आता विपदाकाल 

हे वीर जवान तुम्हें प्रणाम
हे वीर जवान तुम्हें प्रणाम


दोस्तों अगर आपको हमारी पोस्ट "सैनिकों के लिये कविता | हे वीर जवान" पसंद आये तो अपनी राय अवश्य बताएं | ऐसी एक और कविता पढ़ें "फौजी"|
आप यह भी पढ़ सकते हैं :-




कविता "दूर देश से आई बहना"

 रक्षाबंधन पर कविता 



दूर देश से आई बहना
छोटे भाई को बांधने डोरी
आज बहुत हर्षित लगती है 
पहनकर नई हरी साड़ी 

हाथ में पूजा की थाली लेकर
मन ही मन विनती करती 
रहे खुशहाल मेरा भैया 
 है मंगल कामना करती 

झट से फिर भईया ने भी 
अपनी कलाई आगे कर दी
राखी बँधने के बाद में दोंनो ने 
एक-दूजे को बरफी खिला दी

बहना के पैरों को छूकर 
भाई ने उपहार की पैकेट दी
गले लगाकर दीदी ने फिर
बहुत सारी आशीष दीं

हंस करके दीदीजी बोली
हमारे प्रेम में है शक्ति बड़ी 
कल तो थी मैं पड़ी बीमार 
आज सात समुंदर पार आ गई 

बहन -भाई का प्यार देख के
सब की आंखे खुशी से भरी 
रक्षाबंधन की बात निराली 
वैसे तो उत्सव होते हैं कई 


यह भी जरूर पढ़ें
औरत पर कविता "ऊंचा उड़ने की चाह"





सावन पर कविता"आया सावन सुहाना "


सावन पर कविता"आया सावन सुहाना "

सावन पर कविता

ये बारिश की बूंदे
देखकर के दिल झूमे
ये मिट्टी की खुशबू
कर जाए कुछ जादू
जो चलें ठंडी हवाएँ
मन खुद ही गुनगुनाए
कोई चिड़िया पंख फड़फड़ाए
लगे धुन मधुर सुनाये
कहीं मेंढक की टर-टर
कहीं कोयल भी गाये
हम कागज की कश्ती 
को फिर से बनाएँ
चलो झूला झूल आयें 
 ऊंची पेंग भी बढ़ाएँ
लदे अंबियों से वृक्ष
सखी आओ तोड़ लाएँ
है आया सावन सुहाना 
चलो आनंद ले आयें
ऐसी मनोहर बेला तो 
वर्ष में एकबारी आये

दोस्तों यह पोस्ट "सावन पर कविता आया सावन सुहाना "पसंद आए तो अपने विचार बताना ना भूलें|
यह भी पढ़ें |







कविता"अनजान रास्ते "


ये कैसे हैं अनजान रास्ते 
जिस ओर हम हैं बढ़े चले
लगता है डर कहीं बीच में
ये साथ हमारा ना छूट ले

आँधी भी है तूफान भी है
और आग का दरिया भी है
दुआ है अब खुदा से यही 
इन सबको पार कर सकें
ये कैसे हैं अनजान रास्ते 
जिस ओर हम हैं बढ़े चले

खुशियाँ कम और गम भरकर हैं
यहाँ रहना आंसू पीकर है
दुआ है अब खुदा से यही
कि हम तो फौलाद बन सकें
ये कैसे हैं अनजान रास्ते 
जिस ओर हम हैं बढ़े चले
लगता है डर कहीं बीच में
ये साथ हमारा ना छूट ले

जीवन पर कविता |कैसा है जीवन संग्राम

जीवन पर कविता | कैसा है जीवन संग्राम



कैसा है यह जीवन- संग्रामहोता है बड़ा कठिन यह कामपूरे जीवन इसके ही खातिरहम ना करते बिलकुल आरामजीवन के हर इक मोड़ परसंग्राम बिना कहे संग चल देअपने ही भाई-बहनों संग हमबचपन में खिलौंनों पर झगड़तेऔर जब समझदार हो जाते तोउनसे जायदाद पर उलझ पड़तेरोज सुबह आफिस के लिएबसों में हैं ठुस -ठुस के भरतेकिसी से गलती से हाथ लग जायेतो सारे एक से ही चिपट पड़तेकभी तो सिर्फ़ एक रोटी के लिएदीन-हीन आपस में लिपट पड़तेऔर कभी एक लड़की की खातिरदो दोस्त भी बंदूकें चलाया करतेचाहे अच्छा करके या फिर बुरा सब ही तो चाँहे हैं बढ़ना यहाँ इस कर्म में हम सबका नाम हैक्या बच्चे-बूढे या फिर जवान हैंअरे प्यारे इसी का नाम तो जीवन-संग्राम हैहां इसी का नाम तो जीवन-संग्राम है

दोस्तों अगर आपको यह पोस्ट "जीवन पर कविता |कैसा है जीवन संग्राम"अच्छी लगे तो अपनी राय ज़रूर बताएं |आप यह भी पढ़ सकते हैं|आप यह भी पढ़ सकते हैं:-



शिव भजन " आओ भोले बाबा कभी मेरे घर भी आओ "


आओ भोले बाबा कभी
मेरे घर भी आओ
कब से मैं हूँ आस किये
अब के मान जाओ
कब से मैं हूँ आस किये
अब के मान जाओ
हाँ मान जाओ भोले आओ 
बाबा आओ आ भी जाओ

कभी डमरू बजाते हुए 
तो कभी नृत्य तुम दिखाते हुए
कभी गंगा को साथ लिए 
या कभी त्रिशूल हाथ लिए 
नटराजन तुम किसी भी 
रूप में तो आओ
गंगाधर तुम किसी भी 
रूप में तो आओ
बस मैं तो प्रतिक्षा करूँ

अब के मान जाओ
कब से मैं हूँ आस किये
अब के मान जाओ
हाँ मान जाओ भोले आओ 
बाबा आओ आ भी जाओ

कभी राख को लगाए हुए
तो कभी भांग तुम चढ़ाए हुए
कभी साँप को लपेटे हुए
स्वामी तुम स्वांग करते नए- नए
विषधर तुम किसी भी 
रूप में तो आओ
अखिलेशवर मुझे तुम
हर रूप में ही भाओ 
बस मेरी है विनती आखिरी 


अब के मान जाओ
कब से मैं हूँ आस किये
अब के मान जाओ
हाँ मान जाओ भोले आओ 
बाबा आओ आ भी जाओ

नीलकंठ आओ जटाधर आओ
पशुपति आओ प्रजापति आओ 
महादेव आओ परमेश्वर आओ 
गिरिशवर आओ महेश्वर आओ 

माता का भजन पढ़ें
"मन में रटता ही जा"





कविता "भटक गया कुछ समय के लिए"





भटक गया कुछ समय के लिए
मैं अपनी मंजिल से तो
क्या हुआ 
बस थोड़ा सा थका हुआ हूँ  लेकिन
हारा मैं बिल्कुल भी 
नहीं हूं

फिर से कर लूंगा  नई शुरुआत
जिंदगी की
बाजुओं पर अपने तो मुझको है
पूरा यकीन
कमजोरी को अपनी मैं ताकत
बना दिखाऊंगा

जो खोया था हर हसीन पल मैंने
एक-एक गिनकर के वापस
ले आऊंगा
अपनों के होठों की मुस्कानों को
रब से कहकर वापस 
मँगवाऊंगा
अपनी मेहनत के रंगों से
किस्मत की लकीरों को मैं
सँवरवाऊंगा
 बनकर के एक मील का पत्थर
मैं औरों को भी राह
दिखाऊँगा

भटक गया कुछ समय के लिए
मैं अपनी मंजिल से तो
क्या हुआ 



दादी पर कविता
"मेरी दादी "

माता का भजन "कैसे बताऊँ शब्दों में मैं "




कैसे बताऊँ शब्दों में मैं तेरी मेहरबानियाँ
कण-कण में तू ही तो बसती  माता शेरावालिया

हर एक रूप में बहुत ही जचती माता शेरावालिया
हर एक रूप में बहुत ही जचती माता शेरावालिया

हो शेरावालिया  पहाड़ावालिया
हो भर दे झोलियाँ जो दिखती खालियाँ
कैसे बताऊँ शब्दों में मैं तेरी मेहरबानियाँ

औरों को तो महल दे दिए
पर खुद रहती पर्वत पर
जीवन को रौशन करती है 
ज्वाला माता बनकर 
ज्वाला माता बनकर 
ज्वाला माता बनकर 
जीवन को रौशन करती है 
ज्वाला माता बनकर 
हर युग में लिखती हो तुम 
अपनी ममता की कहानियाँ
हर युग में लिखती हो तुम 
अपनी ममता की कहानियाँ

हो शेरावालिया पहाड़ावालिया
हो भर दे झोलियाँ जो दिखती खालियाँ
कैसे बताऊँ शब्दों में मैं तेरी मेहरबानियाँ

माँ का दिल माँ का होता है
ये छोटा- बड़ा न जाने 
चाहें कितनी करें गलतियां
बच्चे तो माँ को प्यारे
बच्चे तो माँ को प्यारे
बच्चे तो माँ को प्यारे
चाहें कितनी करें गलतियां
बच्चे तो माँ को प्यारे
बालक  जो तुम्हे पुकारे तो 
सब छोड़ के आनेवालियाँ 
बालक  जो तुम्हे पुकारे तो 

सब छोड़ के आनेवालियाँ 

हो शेरावालिया  पहाड़ावालिया
हो भर दे झोलियाँ जो दिखती खालियाँ

कैसे बताऊँ शब्दों में मैं तेरी मेहरबानियाँ
कण -कण में तू ही तो बसती  माता शेरावालिया
हर एक रूप में बहुत ही जचती माता शेरावालिया
हर एक रूप में बहुत ही जचती माता शेरावालिया

हो शेरावालिया  पहाड़ावालिया
हो शेरावालिया  पहाड़ावालिया
हो शेरावालिया  पहाड़ावालिया
हो शेरावालिया  पहाड़ावालिया
हो शेरावालिया  पहाड़ावालिया








वर्षा ऋतु पर कविता "उजली-सी हर कली है दिखती"


वर्षा ऋतु पर कविता "उजली-सी हर कली है दिखती"



उजली-सी हर कली है दिखती
और धरती ने कर लिया श्रृंगार
वर्षा ने तो प्रसन्न कर दिया 
हर एक डाली हर एक पात 
खुशबू मिटटी की फैली है
एक-एक कण में आया निखार
क्या कोयल और क्या पपीहा
सुना रहे हैं मिलन का राग 
अब तो सब के पंख आ गये
थमते नहीं धरती पर पाँव
क्या इंसान और क्या पशु-पंछी
हर्षित हुए कर वर्षा में स्नान


धरती पर कविता पढ़ें
धरती माँ






कविता" हाँ तुमने सही कहा था माँ"




हाँ तुमने सही कहा था माँ
हाँ तुमने सच ही कहा था माँ

लेकिन मैं ही था नादान 
शायद मैं ही था अंजान
इस दुनिया के इंसानों से
मुखोटे पहने हुए हैवानो से

कि कुछ ऐसे गलत लोग 
तेरे जीवन में भी आयेंगे
फिर अपनी चिकनी-चुपड़ी
बातों से तुम्हे भ्रमित करवायेंगे


बस तुम रहना इनसे बहुत ही
सावधान देना सिर्फ अपनी पढाई
पर ध्यान वर्ना तो तुम खो
दोगे अपने अस्तित्व की पहचान

पर माँ मैंने तुम्हारी न एक सुनी
करता  रहा बस अपनी मर्जी झूठे
मित्रों पर किया विश्वास  फिर
तो वो ही सब हो गया जो 
स्वप्न में भी ना था मैंने सोचा

अब दूसरे मित्रों को देखता हूँ
तो बहुत मन में पछताता हूँ
कोई बन गया है डॉक्टर तो 
कोई बहुत बड़ा अफसर 

लेकिन मुझे ना कोई पथ मिला
मैं ही भटकुं बस इधर -उधर
अब तुम्हारी बातें याद आती है
मन में कई सवाल उठाती हैं

क्यों मैंने न कहा तेरा माना
क्यों बन के रह गया बेचारा
अब तो बस मैं सबसे ये कहूँ
ना ऐसे मित्रों पर विश्वास करो

जो आंधी की तरह आते है 
सब कुछ तबाह कर जाते है
तुम सब भी इतना याद रखो
 माँ की दी सीखों का ध्यान रखो



भगवान कृष्ण का भजन पढ़ें
"चल रे सखी हम ब्रज को जाएँ"






  










बालकविता "आओ बच्चों तुम्हे समझाऊँ "



आओ बच्चों तुम्हे समझाऊँ
एक बात पते की मैं बतलाऊँ
जीवन में कुछ हांसिल कर सको
उस रास्ते पर चलना सिखलाऊँ
घर से ही तुम यह शुरुवात करो
माता–पिता,बड़ों का सम्मान करो
गुरुओं को भी हमेशा करो नमन
और सत्य के मार्ग पर बढ़े चलो
नित्य सुबह तुम जल्दी से उठके
नहा–धोकर प्रभु से विनती करके
नियम से जो दोगे पढ़ने पर ध्यान
धीरे–धीरे मेधावी तुम बन जाओगे
खेल-कूद को भी समय से करना
और करना सभी महत्वपूर्ण व्यायाम
स्वस्थय शरीर ना जो होगा तुम्हारा
तो पूरे होंगे कैसे बाकी के काम
छोटी –छोटी और काम की बातें
सीखो बुजुर्गों से कुछ तुम जाके
मार्गदर्शन से सभी बड़े जनों के
एक बालक बन सकता है गुणवान  

कविता "मंजिल की तलाश में"

मंजिल की तलाश में मैं 
भटक रहा हूँ इधर-उधर
न जाने कब शाम हुई 
न जाने कब हुई सहर
न जाने कब हंसी थी आई
अब दर्द बढ़ रहा हर पेहर 
डर लगता है के ये जिंदगी
बन जाये न मुश्किल सफ़र
जिसे समझा हमने हमनवा 
वही न समझे अब हाल-ऐ-दिल
न जाने ये किस्मत को है मंजूर
या अरमानो से खेलना बना
हमारे यार का पसंदीदा दस्तूर
इस ही कशमाकश में बीत रही है
जिस्म की हर एक सांस 
होकर के बड़ी ही मजबूर