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कविता "रंग बिरंगी रेल"


रंग बिरंगी रेल

"इस कविता में मैंने बच्चों के द्वारा बनाई गयी मेट्रो ट्रैन का वर्णन किया है|"

रंग बिरंगी रेल है आई
मिलकर बच्चों ने जो बनाई
कितने सुंदर ये डिब्बे हैं
इंजन अब नयी सीटी दे है

किसी डिब्बे का नाम है टिंकू
किसी बोगी का नाम है रिंकी
कोई डिब्बा तो बड़ा ही मोटा है
कोई लगे बहुत ही छोटा है

सब को मिलेंगी चोकलेट टॉफी
सफाई बहुत नज़र अब आती
चांहे देखो पिक्चर मन की
वाई-फाई की भी सुविधा है

अब तो नयी सदी है आई
मेट्रो ट्रेन है बच्चों ने बनाई
ये तो भई सबके मन भाई
सब दोस्तों ने है टिकट कटवाई
(अर्चना)





कविता "एक धरा है एक गगन है"



एक धरा है एक गगन है

"प्रस्तुत कविता देश की एकता को बनाने पर जोर देती है|"

एक धरा है एक गगन है
सब ही खाते एक सा अन्न हैं
एक जैसा है लहू सभी में
फिर भी हम सब क्यों बंटे हैं

क्यों बना लीं इतनी दीवारें
दिल में भी न झाँक हैं पाते
दर्द भरा है सभी के अंदर
ये भी नहीं जता ही पाते

चांहे कोई लगे बहकाने फिर 
भी एक दूजे के हाँथ को थामें
हम एक माता की हैं संताने
साबित करेंगे वक़्त के आने

हम सारे हैं भाई-भाई
तोड़ेंगे जो बेड़ी थी बनाई
इन्सानियत की राह चलेंगे
खुशियों से अब दीप जलेंगे

साथ रहेंगे तभी सवरेंगे
वर्ना तो बस टूट गिरेंगे
कभी ऐसा न होने देंगे
नये भारत का निर्माण करेंगे

हम सशक्त भारत का निर्माण करेंगे
जब युवा सारे मिलकर कहेंगे
जय हो हमारा हिन्दुस्तान
यह हमारा हम इसकी हैं पहचान
यह हमारा हम इसकी हैं पहचान
यह हमारा हम इसकी हैं पहचान

(अर्चना)







कविता "बिटिया रानी"


बिटिया रानी

"प्रस्तुत कविता में मैंने एक छोटी बच्ची की खूबियों का बखान किया है|"

देखो एक है बिटिया रानी 
लाल फ्रॉक में लगे सुहानी
बातों से वो दिल बहलाती
तोतली आवाज में है गाती
नाच-नाच के भी दिखलाती
जैसे घूमती हो फिरकी
चुन्नी है वो ऐसे ओढ़ती
जैसे ब्याह हुआ हो अभी
और नकली में बना के लाती
तरह-तरह के पकवान भी
पापा की है राजदुलारी
और दादी की गुड्डो भी
कोई पंगा नहीं है लेता
बाबा की है चहेती भी
देखो एक है बिटिया रानी 
लाल फ्रॉक में लगे सुहानी
(अर्चना)





बंदर पर हास्यकविता "बंदर-बंदरिया"

बंदर पर हास्यकविता "बंदर-बंदरिया"

बंदर पर हास्यकविता "बंदर-बंदरिया"

निम्नलिखित पोस्ट बंदर पर हास्यकविता "बंदर-बंदरिया" में मैंने बंदर एवं बंदरिया की नोक-झोक का वर्णन किया है|

एक मदारी गली में आया
साथ में बंदर-बंदरिया लाया
फिर दोनों ने रंग जमाया
बड़ा ही प्यारा खेल दिखाया
पहले तो दोनों ने नाच दिखाया
फिर बंदर ने बंदरिया को डंडा दिखाया
फिर बंदरिया ने भी जोर से चिल्लाया
और बहुत देर तक मुँह था फुलाया
फिर बंदर ने बहुत विनती की
केला ,लड्डू और बर्फी भी दी
काला चश्मा भी फिर लगा लिया 
और टाई को गले में सजा लिया
फिर भी न बंदरिया मानी
आज दिखा दी सारी मनमानी
तब बंदर ने लाल चुनरी दिखाई
जिसको देख वो झट से आई
फिर बंदर ने उसको चुनर उड़ाई
और ख़तम हो गयी उनकी लड़ाई
खेल देख सभी को मजा था आया
तालियों से माहोल बनाया


दोस्तों यदि आपको यह पोस्ट बंदर पर हास्यकविता "बंदर-बंदरिया" अच्छी लगे तो अपने बच्चों को जरूर सुनाएँ|आप यह भी पढ़ सकते हैं|








कविता " फूल"


फूल

"प्रस्तुत कविता में मैंने फूल की आकांक्षा का उल्लेख किया है|"

प्रभु हमको तुम फूल बना दो
रंग -बिरंगा हमें करा दो
खुशबू से से हमको महका दो
चाहे हम न किसी का रूप बढ़ाना
न चाहें किसी वरमाला में गुथ जाना
या तो अपने चरणों में हमें बैठाओ
या फिर किसी शहीद पर हमें चढ़ाओ
वो होते बहुत ही हैं महान
देते हैं औरों के लिए अपने प्राण
प्रभु आप और वो होते हैं समान
हम देना चाहें दोनों को सम्मान




कविता "दो भाई"


दो भाई

"इस कविता के माध्यम से मैंने एकता में बल होने का वर्णन किया है|"

घर में रहते थे दो भाई
बात-बात पर करें लड़ाई
मम्मी के हुआ नाक में दम
और पापा की भी शामत आई
मम्मी-पापा बहुत समझाते 
पर वो दोनों बाज़ न आते
एक दिन वो रह गये अकेले
न मम्मी न पापा घर में
एक बंदर घर पर आ धमका
सिट्टी-पिट्टी गुम हुई भाई
बात दोनों को याद ये आयी
मम्मी ने जो थी बतलाई
एकता में होती ताक़त
सोचा रहेंगे साथ में मिलकर
फिर दोनों ने युक्ति बनाई
दिवाली के बम्ब रखे थे
पर वो थोड़ा ऊँचा रखे थे
झट से घोड़ा बना बड़ा भाई
छोटे ने लिए बम्ब उठाए
करा जब बम्ब ने तेज धमाका
बंदर बाहर जोर से भागा
टल गई जो मुसीबत थी आई
अब दोनों रहने लगे प्रेम से
अब खिलौनों से मिलकर खेलते
बांटते अब चोकलेट और मिठाई
दोनों ने प्यार की मिसाल बनाई
घर में रहते थे दो भाई
(अर्चना)