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कविता" सेंटा आये सेंटा आये"

सेंटा आये सेंटा आये

"निम्नलिखित कविता के द्वारा मैंने सेंटा और बच्चों की खुशियों का चित्रण किया है"

सेंटा आये सेंटा आये
कितने सारे तोहफे लाये
दिखते हैं हर दम मुस्काए
हांथों में घंटी भी बजाये
सेंटा आये सेंटा आये

लाल रंग की टोपी पहने
लाल रंग के कपड़े
बूट हैं उनके बड़े-बड़े
लम्बी दाढ़ी में जंचते

सेंटा से ज्यादा मोटा है 
कमर पर लटका थैला
जिस भी गली में है जाते
लगता बच्चों का मेला

बच्चों में मच गयी खलबली
किसको कौन सा गिफ्ट मिले
लाये  हैं मिठाई चोकलेट भी
खाली हाथ न कोई रहे

सेंटा ने बच्चों को समझाया
एक लाइन में उन्हें लगाया
बांटे सबको ही तोहफे
अब तो सब खुश हैं होते

कर गए फिर सब ही को टाटा
अपनी गाड़ी में बैठ गये
बोले अगले साल फिर आऊँगा
बच्चों से मिल कर के गले

सेंटा आये
 सेंटा आये
कितने सारे तोहफे लाये
दिखते हैं हर दम मुस्काए
हांथों में घंटी भी बजाये
सेंटा  आये सेंटा आये
(अर्चना)


कविता "क्रिसमस आया क्रिसमस आया "


क्रिसमस आया क्रिसमस आया 

"इस कविता में मैंने क्रिसमस की रौनक का उल्लेख किया है|"




क्रिसमस आया क्रिसमस आया 
साथ में ढेरों खुशियाँ लाया
हमने भी अपना घर है सजाया
और सुन्दर सा केक बनाया

कहीं सज रही झालरें 
और जली हैं मोमबत्तियां
आने वाले हैं सेंटा
भर के थेले में बहुत से 
उपहारों की खुशियाँ

बच्चों को तो  होता बहुत दिनों से
इस दिन का ही इंतज़ार
आज मिलेंगे खिलौने-टोफियाँ
और सेंटा का बहुत सा दुलार

आज ही के दिन लिया था
प्रभु येशु ने जन्म
मंगल गान कर के सभी
लें इस दिन का आनंद

बांटे सबको प्यार हम
और न करें बुरा कर्म
हर धर्म देता सीख के 
मिलके सदा ही चलें हम 
(अर्चना)






कविता "रंग बिरंगी रेल"


रंग बिरंगी रेल

"इस कविता में मैंने बच्चों के द्वारा बनाई गयी मेट्रो ट्रैन का वर्णन किया है|"

रंग बिरंगी रेल है आई
मिलकर बच्चों ने जो बनाई
कितने सुंदर ये डिब्बे हैं
इंजन अब नयी सीटी दे है

किसी डिब्बे का नाम है टिंकू
किसी बोगी का नाम है रिंकी
कोई डिब्बा तो बड़ा ही मोटा है
कोई लगे बहुत ही छोटा है

सब को मिलेंगी चोकलेट टॉफी
सफाई बहुत नज़र अब आती
चांहे देखो पिक्चर मन की
वाई-फाई की भी सुविधा है

अब तो नयी सदी है आई
मेट्रो ट्रेन है बच्चों ने बनाई
ये तो भई सबके मन भाई
सब दोस्तों ने है टिकट कटवाई
(अर्चना)





कविता "एक धरा है एक गगन है"



एक धरा है एक गगन है

"प्रस्तुत कविता देश की एकता को बनाने पर जोर देती है|"

एक धरा है एक गगन है
सब ही खाते एक सा अन्न हैं
एक जैसा है लहू सभी में
फिर भी हम सब क्यों बंटे हैं

क्यों बना लीं इतनी दीवारें
दिल में भी न झाँक हैं पाते
दर्द भरा है सभी के अंदर
ये भी नहीं जता ही पाते

चांहे कोई लगे बहकाने फिर 
भी एक दूजे के हाँथ को थामें
हम एक माता की हैं संताने
साबित करेंगे वक़्त के आने

हम सारे हैं भाई-भाई
तोड़ेंगे जो बेड़ी थी बनाई
इन्सानियत की राह चलेंगे
खुशियों से अब दीप जलेंगे

साथ रहेंगे तभी सवरेंगे
वर्ना तो बस टूट गिरेंगे
कभी ऐसा न होने देंगे
नये भारत का निर्माण करेंगे

हम सशक्त भारत का निर्माण करेंगे
जब युवा सारे मिलकर कहेंगे
जय हो हमारा हिन्दुस्तान
यह हमारा हम इसकी हैं पहचान
यह हमारा हम इसकी हैं पहचान
यह हमारा हम इसकी हैं पहचान

(अर्चना)







कविता "बिटिया रानी"


बिटिया रानी

"प्रस्तुत कविता में मैंने एक छोटी बच्ची की खूबियों का बखान किया है|"

देखो एक है बिटिया रानी 
लाल फ्रॉक में लगे सुहानी
बातों से वो दिल बहलाती
तोतली आवाज में है गाती
नाच-नाच के भी दिखलाती
जैसे घूमती हो फिरकी
चुन्नी है वो ऐसे ओढ़ती
जैसे ब्याह हुआ हो अभी
और नकली में बना के लाती
तरह-तरह के पकवान भी
पापा की है राजदुलारी
और दादी की गुड्डो भी
कोई पंगा नहीं है लेता
बाबा की है चहेती भी
देखो एक है बिटिया रानी 
लाल फ्रॉक में लगे सुहानी
(अर्चना)





बंदर पर हास्यकविता "बंदर-बंदरिया"

बंदर पर हास्यकविता "बंदर-बंदरिया"

बंदर पर हास्यकविता "बंदर-बंदरिया"

निम्नलिखित पोस्ट बंदर पर हास्यकविता "बंदर-बंदरिया" में मैंने बंदर एवं बंदरिया की नोक-झोक का वर्णन किया है|

एक मदारी गली में आया
साथ में बंदर-बंदरिया लाया
फिर दोनों ने रंग जमाया
बड़ा ही प्यारा खेल दिखाया
पहले तो दोनों ने नाच दिखाया
फिर बंदर ने बंदरिया को डंडा दिखाया
फिर बंदरिया ने भी जोर से चिल्लाया
और बहुत देर तक मुँह था फुलाया
फिर बंदर ने बहुत विनती की
केला ,लड्डू और बर्फी भी दी
काला चश्मा भी फिर लगा लिया 
और टाई को गले में सजा लिया
फिर भी न बंदरिया मानी
आज दिखा दी सारी मनमानी
तब बंदर ने लाल चुनरी दिखाई
जिसको देख वो झट से आई
फिर बंदर ने उसको चुनर उड़ाई
और ख़तम हो गयी उनकी लड़ाई
खेल देख सभी को मजा था आया
तालियों से माहोल बनाया


दोस्तों यदि आपको यह पोस्ट बंदर पर हास्यकविता "बंदर-बंदरिया" अच्छी लगे तो अपने बच्चों को जरूर सुनाएँ|आप यह भी पढ़ सकते हैं|








कविता " फूल"


फूल

"प्रस्तुत कविता में मैंने फूल की आकांक्षा का उल्लेख किया है|"

प्रभु हमको तुम फूल बना दो
रंग -बिरंगा हमें करा दो
खुशबू से से हमको महका दो
चाहे हम न किसी का रूप बढ़ाना
न चाहें किसी वरमाला में गुथ जाना
या तो अपने चरणों में हमें बैठाओ
या फिर किसी शहीद पर हमें चढ़ाओ
वो होते बहुत ही हैं महान
देते हैं औरों के लिए अपने प्राण
प्रभु आप और वो होते हैं समान
हम देना चाहें दोनों को सम्मान




कविता "दो भाई"


दो भाई

"इस कविता के माध्यम से मैंने एकता में बल होने का वर्णन किया है|"

घर में रहते थे दो भाई
बात-बात पर करें लड़ाई
मम्मी के हुआ नाक में दम
और पापा की भी शामत आई
मम्मी-पापा बहुत समझाते 
पर वो दोनों बाज़ न आते
एक दिन वो रह गये अकेले
न मम्मी न पापा घर में
एक बंदर घर पर आ धमका
सिट्टी-पिट्टी गुम हुई भाई
बात दोनों को याद ये आयी
मम्मी ने जो थी बतलाई
एकता में होती ताक़त
सोचा रहेंगे साथ में मिलकर
फिर दोनों ने युक्ति बनाई
दिवाली के बम्ब रखे थे
पर वो थोड़ा ऊँचा रखे थे
झट से घोड़ा बना बड़ा भाई
छोटे ने लिए बम्ब उठाए
करा जब बम्ब ने तेज धमाका
बंदर बाहर जोर से भागा
टल गई जो मुसीबत थी आई
अब दोनों रहने लगे प्रेम से
अब खिलौनों से मिलकर खेलते
बांटते अब चोकलेट और मिठाई
दोनों ने प्यार की मिसाल बनाई
घर में रहते थे दो भाई
(अर्चना)






कविता "दादी की कहानी"

दादी की कहानी


"इस कविता में एक बालक अपनी दादी से एक अनोखी कहानी सुनने का आग्रह कर रहा है|"



दादी सुनाओ एक कहानी
जिसमे हो एक सुंदर रानी
राजा भी आये घोड़े पर
सुनकर जिसे हो बड़ी हैरानी

परियाँ भी उतरें धरती पर
हाँथ में हो सुंदर सी छड़ी
जो मांगू मुझको दे दें वो
चाकलेट आइसक्रीम और कैंडी

जादुई नगरी में पहुँचाओ
तरह -तरह के पशु वहां हों
हांथी राजा के सर जहाँ
एक बंदर का सिर जुड़ा हो

तितली गाती हो जहाँ गाना
नाचे गधा होकर दीवाना
मैना रानी गिटार बजाये
देख के हम भी मस्त हो जाएँ

दादी सुनाओ एक कहानी
जिसमे हो एक सुंदर रानी
राजा भी आये घोड़े पर
सुनकर जिसे हो बड़ी हैरानी
(अर्चना)




कविता "दिवाली"


दिवाली

"प्रस्तुत कविता में मैंने दीवाली के दृश्य का वर्णन किया
है"

दीप जगे हैं घर सजे हैं
सबके चेहरे खिले लगे  हैं
बच्चे आतिशबाजी करके 
देखो कैसे नाच रहे हैं
खील-बताशे मिठाइयाँ
सब बड़े चाव से ही खा 
रहे हैं उपहार दे एक-दूजे
को खुशियाँ आपस में
बाँट रहे हैं और लौटे 
अयोध्या राम आज के
दिन इसलिये दीवाली 
उत्सव मना रहे हैं
अच्छाई पर बुराई की
जीत हुई इसलिये
अंधकार को मिटा रहे हैं
(अर्चना)






कविता "जन्मदिन मेरा"



जन्मदिन मेरा

"इस कविता के माध्यम से एक बच्चा अपने जन्मदिन की विभिन्न तैयारियां कर रहा है|"


पापा पापा पापा
घर जल्दी से आना
जन्मदिन मेरा 
आज केक लेते आना
साथ में लाना
टॉफी और चाकलेट्
दोस्त हैं बुलाये 
मैंने तो बहुत से
कोल्डड्रिंक को भी
भूल न जाना
वापस पड़ेगा 
वर्ना बाज़ार जाना
सजाने के लिए सुंदर
 झालर भी लाना
बहुत सारे गुब्बारों 
से घर भी है सजाना
गरमागरम समोसे
 खट्टी-मिट्ठी चटनियाँ
लेकर आना बर्थडे हैट
 और मोमबत्तियाँ
रिटर्न्स गिफ्ट्स को 
भी लेकर आना
वर्ना देंगे मुझे 
दोस्त बहुत ही ताना
सबसे ज़रूरी है जो 
उसे भूल न जाना
बर्थडे गिफ्ट है
मुझे मेरे दोस्तों 
को दिखाना
(अर्चना)

कविता "पार्टी"

पार्टी


"प्रस्तुत कविता में बच्चों ने दावत में जाकर जो मस्ती की उसका वर्णन है|"

आज हमें पार्टी में जाना 
मजे करेंगे यह है ठाना
डी.जे. और बाजे के संग
हम नाचेंगे धिकतानाना
बैठेंगे घोड़ी पर भी
छोटा दूल्हा बनके हम
आगे -पीछे होंगे सब 
लगेगा हम हैं राजाजी
खाएँगे लड्डू-बर्फी
पियेंगे कॉफ़ी और कोल्डड्रिंक
दूल्हा -दुल्हन के साथ में
खिंचवायेंगे फोटो भी
आते-आते घर को वापस 
माँ की गोद में सोएंगे जी
याद रखेंगे इस पार्टी को 
क्योंकि बहुत करी मस्ती
(अर्चना)



कविता "फौजी"

फौजी



"प्रस्तुत कविता में एक बच्चा अपनी माँ से उसको सैनिक बनाने का आग्रह कर रहा है|"



                                   बंदूक मुझे भी दिला दो माँ
फौजी की वर्दी पहना दो माँ
मैं भी सीमा पर जाऊँगा
दुश्मनों को मार गिराऊंगा
मैं मातृभूमि के हर कोने पर
तिरंगा अपना ही फैहराऊंगा



कविता "विनती"



विनती


"इस कविता में भगवान से बच्चों की विनती है|"


भगवान हम अभी बच्चे हैं 

कर्म हमारे कुछ कच्चे हैं

तुम से हम विनती करते

 तुम दे दो हमे यह वरदान
हम रखें सभी का ही ध्यान
छोटों पर हम स्नेह बरसा दें
और बड़ों का  भी सम्मान करें
जो दुखी कोई भी दिखाई दे 
हम आँसू उसके पोंछ दें
(अर्चना)