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दिल पर कविता | poetry on heart

 दिल पर कविताएं 

दोस्तों ये जो दिल है ना ,कहते हैं बड़ा ही पागल होता है|ये जानकार भी कि अगर आपने किसी से दिल लगाया तो आपको बहुत सारी परेशानियां हो सकती हैं मगर ये कहाँ मानता है | दिल की कुछ नादानी और बचकानी हरकतों को बयान करती यह दो कवितायें पढ़िये| |



जब दो दिल मिल गए



जब दो दिल मिल गए
  कुछ ख़्वाब ऐसे बुन गए
अब हसरतें जगने लगीं
और दर्द पुराने गुम गए

हर तरह कलियाँ खिलीं
हवाएँ रेशम लगने लगीं
हर जर्रे में महबूब ही दिखे
अब खुद पे जोर न चले

कभी बात-बात पे हँसें
हर आहट पे ये दिल रुके
अब तेरे दिल की धड़कनें
 मेरे दिल में लगी हैं गूंजने






 दिल का रिश्ता

जो तुझसे दिल का रिश्ता है
उसे नाम मैं ना दे सकूँ
बस दूर से यही चाहता 
तुझे पास महसूस कर सकूँ  

पता मुझे यह अच्छे से

 मिलन नहीं होना ये कभी
क्यूंकि तू बंधा हुआ है
 दुनिया की रस्मों,रिवाजों से

बस तेरी तस्वीर के आगे

 मैं रोज इनायत करता हूँ
तू ही सबकुछ है लेकिन
तेरे सामने पराया बनता हूँ


दिल की और सुनने का मन करे तो यह
गीत भी पढ़ सकते हैं :- "जब दिल दीवाना होता है "









हास्यकविता "अपने बच्चे कम थे क्या "

हास्यकविता "अपने बच्चे कम थे क्या "





अपने बच्चे कम थे क्या 
कि पड़ोस के भी आ गए
अब तो लगता है जैसे
मेरे बच्चों के भी भाव बड़े
कभी मांगते चिप्स के पैकेट
और कभी मांगते कुरकुरे
नींद तो पहली ही कम मिलती 
अब होश भी हैं मेरे उड़ गए 
न जाने शाम तक आते-आते
कितनी बार बर्तन धोने पड़ें
घर को बनाया जंग का मैदान
अब दीवारों पर चित्रकारी करने बढ़े




बच्चों पर एक और कविता पढ़ें
"बच्चे"



हास्यकविता "हमारी नैनीताल यात्रा"


हास्यकविता "हमारी नैनीताल यात्रा"

☂☂☂☂☂☂☂☂☂☂☂

जनवरी के महीने में हमने
नैनीताल का प्लान बनाया
सोचा था के नई साल पर
छुट्टियों का जाये लुफ्त उठाया
पर हो गयी बहुत बड़ी गड़बड़
रात में आ गयी बारिश झर-झर
गये थे हम छोटे बच्चों को लेकर
बहुत पछताए फिर वहां जाकर 
बच्चों को लग गयी उल्टियां
और कहीं भी न घूमे हम
 ख़राब मौसम चलते नावें बंद हो गई 
ताल की सैर भी न कर पाए हम
होटल के कमरे में सारा दिन बीता
न पहुंचे भीमताल न पहुंचे मुक्तेश्वर
अगले दिन फिर बैग उठाके
वापस आ गए घर को हम

😄😄😄😄😄😄😄😄






हास्य कविता "बबलू भैया की कार "



हास्य कविता "बबलू भैया की कार "




बबलू भईया गाँव चले
नई कार में खूब जचे
चश्मे,टोपी में चमकें
स्टाइल दिखाये बिना नहीं रुके
तीन घंटे में जब गाँव पहुंचे 
उन्हें देख बच्चे उछले
भईया ख़ुशी से बहुत अकड़े
सोचे बच्चे कितना याद करें
पर बच्चे निकल गए साइड से
गाड़ी पर  सब जा चिपके
कोई  बैठा छत पे  चढ़ के
कोई शीशे में चेहरा देखे
कोई  वाईपर को खींच रहा
बाकि के सीटों पर कूदें
ये सब देख भईया चौंके
कोई भी न चाय -पानी पूंछे
भीड़ लगा बस कार तकें
ऊपर से गर्मी थी भयंकर
पसीना तर-तर था टपके
फैंका चश्मा और सूट फैंक के
भईया वहां से रफुचक्कर हुए







सेल्फी पर हास्यकविता "हंसती-सेल्फी रोती सेल्फी"


सेल्फी पर कविता" हंसती-सेल्फी रोती सेल्फी"




हंसती-सेल्फी रोती सेल्फी
उठते-सेल्फी सोते सेल्फी
बड़े-छोटे सब लेते सेल्फी
मुझको भी यह लत लगी

पहाड़ पर सेल्फी पानी में सेल्फी
पाउट बना बना करना मस्ती
नए- नए से पोज़ देने के चक्कर  में
आईस-क्रीम कपड़ों पर पिघल गिरी

इंडिया-गेट पर सेल्फी मेले में सेल्फी
चांहू फ्रेंड से भी बढ़कर अपनी डी.पी. 
भीड़-भाड़ और सेल्फी के चक्कर में 
ना जाने कब मेरी जेब कटी

लेकिन चांहे कुछ भी हो जाये
छुटती नहीं ये व्याधा गले पड़ी
स्वप्न में भी कल ले ली मैंने
अप्सराओं के संग में सेल्फी