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प्रेरणादायी कविता "कभी हंस दो ऐसे भी तुम"

प्रेरणादायी कविता

प्रेरणादायी कविता - कभी हंस दो ऐसे भी तुम


मत ढूंढो सिर्फ बड़ी- बड़ी बजहें

तुम मुस्कुराने के लिए

कभी हंस दो ऐसे भी तुम

अपना दिल बहलाने के लिए    

मत सोचो कल क्या होना

बस जी लो इस लम्हे के लिए  

हर लम्हे में बहुत खुशी छुपी है 

ज़रा जी के देखो औरों के लिए

कुछ लोग जीवन में आते हैं

कुछ होते चले जाने के लिए

फिर भी जीवन एक हसीन सफर है

यहाँ हर एक ही मुसाफिर के लिए

उलझने तो आती-जाती हैं तुम्हें

कुछ सबक नए सिखलाने के लिए

जो इनका हँसकर करे सामना

वो इंसान होता प्रेरणा सबके लिए

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नसीब पर कविता "अपना-अपना एक नसीब"

नसीब पर कविता "अपना-अपना एक नसीब"

नसीब पर कविता


यहाँ सब ही का होता है 
अपना-अपना एक नसीब
सदियों से चली आ रही
इस दुनिया की ये ही रीत
जो मुझ पर है उसकी मुझको 
कदर अभी  क्यों होती नहीं
ऊंचे से करना चाहूँ बराबरी
पर कभी भी यह सोचा नहीं
जो मुझ पर है वो भी तो शायद
हर किसी को तो मिलता नहीं
क्यों नहीं कभी खतम होती
यह हिरस की राह जो मैंने है चली ?

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जिंदगी पर कविता "इस जिंदगी की कशमकश में "

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इस जिंदगी की कशमकश में 
कुछ ख्वाब हुए पूरे 
पर जो जरूरी थे वो ही बस क्यों रह गए अधूरे 

दौड़े थे वक़्त से भी आगे
और छू के भी देख लिए सितारे
मगर हम अपनो के ही जज़्बात पढ़ना भूल गए
इस जिंदगी की कशमकश में 
कुछ ख्वाब हुए पूरे 
पर जो जरूरी थे वो ही बस क्यों रह गए अधूरे 

पा लिया था नाम ऊंचा 
और दुनिया में  भी पहचान बना ली 
मगर हम अपनों की ही नज़र से बहुत दूर हो गए 
इस जिंदगी की कशमकश में 
कुछ ख्वाब हुए पूरे 
पर जो जरूरी थे वो ही बस क्यों रह गए अधूरे 

ना करी रात-दिन की फिकर
और काम में अपने हर मौसम भूले
मगर अपनों की छोटी -छोटी खुशी घर ले आना भूल गए
इस जिंदगी की कशमकश में 
कुछ ख्वाब हुए पूरे 
पर जो जरूरी थे वो ही बस क्यों रह गए अधूरे 
इस जिंदगी की कशमकश में