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दिवाली के लिए बधाई संदेश | diwali messages with picture

दिवाली के लिए बधाई संदेश | diwali messages with picture

दोस्तों आने वाली 19 ता. को हमारे देश में और अन्य देशों में भी दिवाली को मनाया जाएगा | दिवाली रोशनी  के साथ -साथ साल का सबसे बड़ा  त्योहार होता है |दिवाली के आने से  कई दिनों पहले से ही जगह -जगह बाज़ार लग जाते हैं|हर तरफ एक चहल-पहल सी दिखाई देने लगती है|दीवाली के साथ-साथ ही अन्य त्योहार जैसे धनतेरस गोवर्धन पूजा,भैया दूज भी मनाया जाता है जिससे सभी जगह एक हर्ष - उल्लास का वातावरण बन जाता है |बच्चों को तो दिवाली का बेसबरी से इंतज़ार रहता है |

दिवाली के लिए बधाई संदेश | diwali messages with picture

दोस्तों पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भारत में कई जगह पटाखों की बिक्री पर बैन लगा दिया है|दोस्तों  यह एक अच्छा प्रयास है हमें सरकार का साथ देना चाहिए |हम दिवाली दीपक जलाकर ,उपहार देकर और भी भिन्न तरीको से मना सकते हैं |इसलिए दोस्तों आप messages के जरिये अपने दोस्तों और प्रिय परिजनो को बधाई पहुंचाये और ecofriendly diwali मनाएँ |हम भी कुछ बधाई संदेश लाये हैं जिनहे आप free download कर सकते हैं |

दिवाली बधाई संदेश

दिवाली के लिए बधाई संदेश | diwali messages with picture


दिवाली के लिए बधाई संदेश | diwali messages with picture


दिवाली के लिए बधाई संदेश | diwali messages with picture

दिवाली के लिए बधाई संदेश | diwali messages with picture





दोस्तों यह थे कुछ दिवाली शुभकामना संदेश |आप हमें अपने संदेश भी भेज सकते हैं |आप सब लोगों को raahien.com की तरह से हैप्पी दिवाली |
आप यह भी पढ़ सकते हैं |






भगवान राम पर कविता

भगवान राम पर कविता 

भगवान राम पर कविता

भगवान राम पर कविता "राम तुम्हारे देश में क्यों "

राम तुम्हारे देश में क्यों 
बढ़ गया इतना अपराध  
फिर से आओ धरा पर तुम
कर दो सभी शत्रुओं का नाश

विद्द्या के मंदिर थे जो पहले 
क्यों बन गए व्यापार की दुकान 
इतना क्या कम था अब तो नित्य
छिन रहे बच्चों की मुस्कान और प्राण

कुछ मिनटों के भीतर ही कहीं  
एक नारी शोषित होती है 
और कई दरिंदों के हांथों से क्यों 
मासूम बच्चियाँ कुचली जाती हैं

अपने बूढ़े माँ -बाप को क्यों
उनका ही कुलदीपक सताता है
और कहीं बेबस सास को 
क्रूर बहू के द्वारा पीटा जाता है 

क्यों जल रही लालच की अग्नि
में घर की ही थीं जो लक्ष्मियाँ
क्या इसी दिन को देखने खातिर
माँ-बाप करते पाल-पोस बेटी को बड़ा

मन में बहुत सारे सवाल उठे हैं 
पापी अगिनत भरे पड़े हैं 
पहले तो एक रावण ही था 
अब तो कदम-कदम रावण खड़े हैं

ना करो तनिक तुम इंतजार 
अब तो मचा है हाहाकार
आ जाओ लेकर फिर धनुष-बाण
कर दो इन पापियों का संघार

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अंधविश्वास पर कविता "कुछ बाबाजी "


अंधविश्वास पर कविता


"कुछ बाबाजी"

भोले - भाले लोगों को 
कुछ बाबजी रोज हैं ठगते
साइन्स के एक्सपेरिमेंट दिखा
खुद को भगवान बताया करते

पर अंदर से ये बहुत मेले 
अत्याचार महिला पर करते 
बाहर से दिखावे के लिए
ब्रह्मचर्य का पालन करते 

जितना धन ना उद्द्योग्पतियों पर
खजाने इनके पास में मिलते
आश्रमों में इनके ही तो 
लाठी ,तमंचे और बंदूके मिलते

ऐसे लोग ही औरत को 
पुत्र प्राप्ति की दवाएं देते
पुरुषों में होते ये जीन्स
 अनपढ़ , गंवार कहाँ समझते

पहन कर के केसरिया चोला 
रूप नये -नये हैं धरते 
बगल में तो होता चाकू
 होंठ से राम जपा करते 

भूत-प्रेत के अस्तित्व को
ये ही हैं बढ़ावा देते
खुद जीते फाइव स्टार की जिंदगी
जनता से नेम- व्रत करवाते

ऐसे पाखंडी लोगों के 
ना बहकावे में कभी भी आना
वर्ना तन , मन और धन से
होगा इनके ही आधीन हो जाना




विश्वास पर कविता पढ़ें 
"मैं हूँ वो मन का विश्वास"